D drunkenpen en July 23, 2025 दूरियां न कभी जान सके ये दूरियां क्यों ,लफ्ज़ थे फिर भी मजबूरियाँ क्यों ,दिलों की बातें हक़ीक़त थी तो ये खामोशियाँ क्यों, कुछ ख्वाब जो मिल के बुने थे हम ने तो फिर एस हाथों में काली डोरियां क्यों ।©drunkenpen