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दूरियां

न कभी जान सके ये दूरियां क्यों ,
लफ्ज़ थे फिर भी मजबूरियाँ क्यों ,
दिलों की बातें हक़ीक़त थी तो ये खामोशियाँ क्यों, कुछ ख्वाब जो मिल के बुने थे हम ने तो फिर एस हाथों में काली डोरियां क्यों ।
©drunkenpen