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ए आ जिंदगी दौड़ लगाते हैं

ए आ जिंदगी दौड लगाते है
जो छूट गए है हसी के पल पीछे
आज उन्ही पलों को मोड़ लाते हैं
ए आ जिंदगी दौड़ लगाते हैं
कुछ पल अन्ध्यारी गली के
कुछ पल उज्य़ारी गली के
वो सुकून के पल ढूंढ लाते है
ए आ जिंदगी दौड़ लगाते हैं
ए आ जिंदगी मेरे गाव मे चलते हैं
वो मिट्टी की खुश्बू सूँघ लेते हैं
वो सवेरे के हसी लम्हे ढूंढ लेते हैं
ए आ जिंदगी दौड़ लगाते हैं
ए आ जिंदगी मेरे घर चलते हैं
जहा खेला मै वो आंगन देख लेते है
बचपन गुजारा था वो दामन ढूँढ लाते हैं
ए आ जिंदगी दौड़ लगाते हैं
ए आ जिंदगी मेरे महबूब की गली मे चलते हैं
उसके घर के सामने बैठ खुदा की आवाज सुनते हैं
महबूब के साथ गुजारे हसी लम्हे ढूंढ लाते हैं
ए आ जिंदगी दौड़ लगाते हैं
©5bharat