राहों में आज अकेले हैं,
और जरूरत हैं आपकी,
दिल हैं कहीं खोया हुआ,
और यादें हैं आपकी।।
अब ना सितम सहा जाए,
ना दर्द तेरी बेवफ़ाई का,
थक चूँके मिन्नतों सें,
बस साथ चाहिए आपका।।
रेंगते रहें सालों ज़िन्दगी के दर पर,
तरस नहीं खाती बेवफ़ा हुई मौत भी,
गिर चूँके हैं अजीब उलझन में,
बस सहारा चाहतें हैं आपका।।
खुशियाँ हुई हैं दफ्ऩ जमीं में कहीं,
और हम मौत कि गोद में हैं,
सिर्फ़ कुछ पल सम्भलना चाहतें हैं,
बस एक एहसान चाहतें हैं आपका।।
- Nilesh Ingole
©nilesh2016
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