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एहसाज़

ज़िन्दगी उस दौर पर खड़ा हैं
जहाँ कोई राह नहीं
अधेरे के तले कोई छाँव नहीं
नज़ारें हर तरफ हैं लेकिन कोई
एहसाज़ नहीं
अब कहाँ जाऊं जहाँ कोई और नहीं
©shamaya