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एक दृश्य ऐसा भी

क्यों थम सा गया है ये जहां
धुआं सा लगता है अब ये आसमां
खो गई है जैसे इसकी कोई तस्वीर
है समेटे इन बादलों की चादर को
फ़िर भी लगता है सुनसान सा
नजारा ही कुछ ऐसा था
मानो कोई भी ना हो इस जग में
शांत सा हर जगह अपने में ही खोया सा
था ये जहां।
पुकारे भी तो किसको पुकारे
सुनने वाला ही गुम सा हो गया था
हम अकेले ,हमारी धड़कन अकेली
चल पड़े थे खोज में एक स्वर के
जो शायद हमसे पहले ही जा चुकी थी
©anusingh