एक कागज़ का टुकड़ा हमसे दूर है
उसके बिना यह जिंदगी बेनूर है
हमने तो कोई कसर नहीं छोड़ा उसे पाने की
अगर न मिले, इसमें मेरा क्या कसूर है
बड़ी अहमियत हैं जिंदगी में रूपए-पैसों की
सब कुछ यही इस युग में हजूर है
पैसों से है इज्जत पैसों से है इंशां की पहचान
पैसों के लिए बलाएँ सभी मंजूर है
चलो फिर कोशिश करें कुछ हम भी कमाएं राही
ऩफा-नुकसान तो यह बिजनेस का दस्तूर है।