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एक खोट खुदा में भी।

मैं लड़ू मुकदमा उस अभागे इन्सान की
जिसने गंवाई जान गलती थी केवल भगवान की।
ये खुदा बनाई तुने दुनिया में खुबसुरत इंसान
फिर क्या जल्दी थी जो तूने ले लिया असमय प्राण।
फुलों से तुने बाग बनाया सुंदर सा फिर गांव बसाया
हर जिव था गदगद हम भी खुश थे देख कर तेरी माया।
तेरे दिल में गर भेद न हो तो जग सारा तेरा अपना था
हमनें भी तेरे ही दम पर पाल रखा इक सपना था।
तेरे कहर की सुचि ब्यान कर रहा हूं आपबीती से
बर्बाद कर डाला तुने किस विधान किस रीति से।
आज मेरा कोई ठौर नहीं मेरी नजर में तेरा मोल नहीं
साक्ष्यों का अंबार पड़ा मगर खिलाफ तेरे कोई बोल नहीं।
तू तो सर्वशक्तिमान बना है मनमानी ही करता है
इंसां तो बेबस पड़ा है जो डरा सहमा रहता है।
कब किसका घर टुटे कब किसका सिंदुर मिटे
फिक्र नहीं तुझे कि कब किसका अर्थी उठे।
अगर डाला है जान तो उम्र भर तो जिने दो
अभिनय अदा कर हर पात्र का खुशी खुशी तो मरने दो।
बस यही प्रार्थना यहीं विनती है दुनिया के पालनहार से
और नहीं बचा है अब अनुराग के शिकायत व भंडार से।
©anuragrahi