होकर परेशान जिंदगी से
हमने लिखा परमात्मा को एक खत है
बुला ले अपने पास मुझे
यहां जमीं पर ठीक नही मेरी हालत है
जिस देश में हूं रहता
नींव कमजोर,नाजुक उसकी छत्त है
जिस घर का हूं मैं मालिक
वहां कुत्तों सी मेरी कीमत है
रक्खा भी मुझको इसलिये देश में
क्योंकि मेरे पास एक मत है
और कैसे ब्यान करूं अपने दिल का दर्द
मेरे अपने ही लोग करते मुझ पर हुकुमत है
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©vicky31
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