V

एक किताब

जीता रहा मै अपनी धुन मे,
दुनिया का कायदा नही देखा !
रिश्ता निभाया तो दिल से,
कभी फायदा नही देखा !
एक किताब की तरह हूँ मैं,
कितनी भी पुरानी हो जाए,
पर उसके अलफ़ाज़ नहीं बदलेंगे !
कभी याद आये तो,
पन्ने पलट कर देखना,
हम कल जैसे थे,आज वैसे है, 
कल भी वैसे ही मिलेंगे !
🌹🌹🌹
©vikasgarg