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एक फौजी का दिल

एक फौजी का दिल
“एक फौजी का दिल”

सब कुछ होकर भी तू रोता है,
कभी उस फौजी को भी सोच जो तेरे लिए हर रोज़ लड़ता है।

अपने लहू से मिट्टी का कर्ज़ अदा करता है,
हर साँस में वो देश की हिफाज़त लिखता है।

उसका भी तो एक परिवार होता होगा,
किसी की दुआओं का इंतज़ार होता होगा,
किसी की आँखों में बसा उसका प्यार होता होगा…

माँ का आँचल, पिता का सहारा छोड़ा है,
दोस्तों का हँसना, रिश्तों का किनारा छोड़ा है,
अपना हमसफ़र तक उसने पीछे छोड़ा है,
फिर भी हर दर्द को मुस्कुरा कर झेला है।

ना उसके पास हर रात छत होती है,
ना हर दिन रोटी और पानी की राहत होती है,
कभी बीमारी में सर पर हाथ रखने वाला कोई नहीं,
और कभी उसकी खामोशी सुनने वाला कोई नहीं।

ना माँ का प्यार से माथा चूमना होता है,
ना पिता का गले लगाना नसीब होता है,
ना भाई का साथ, ना बहन की शरारत होती है,
उसकी दुनिया बस ज़िम्मेदारियों में सिमट जाती है।

और कहीं दूर…
एक आँख उसके लिए रोती भी होगी,
एक दिल उसे याद करके सोता भी होगा,
वो हमसफ़र जो खुद को भूल कर जीता है,
हर पल उसके लौट आने की दुआ करता होगा।

पर वो…
ना अपनी तड़प जताता है, ना अपना दर्द सुनाता है,
वो सिर्फ देश के लिए जीता है, देश पर ही मिट जाता है।

उसकी मोहब्बत भी अधूरी कहानी बन जाती है,
पर उसकी वफादारी पूरे वतन की निशानी बन जाती है… 🇮🇳

Ink&Emotions