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एक रोज़ तो तू इस दिवाने के लिए आ।

एक रोज़ तो तू इस दिवाने के लिए आ
कभी ग़म दिल से भगाने के लिए आ।
जैसे तुम्हें नहीं आते हैं आने के बहाने
वैसे ही एक बार न जाने के लिए आ।
ले जाएगी जां मेरी देर रात तक का जगना
मुझे समय से सुलाने के लिए आ।
आज कल आपकी तस्वीर भी नही बनती
फिर से पहली सी तस्वीर बनवाने के लिए आ।
माना कि मुहब्बत छुपाना है मुहब्बत
किसी रोज अनुराग को जताने के लिए आ।
©anuragrahi