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एकात्मता

एकात्मता
ईश्वर के कंधे पर सवार होकर
हृदय को अपने ईश्वरीय प्रेम से धोकर
जगत की मिथ्यता को इस जगत में खोकर
जीवन की राहों को पार करना
अंतर्मन से ईश्वर की पुकार करना
उनकी असीमता में समर्पण स्वीकार करना
उन्हीं के स्मरण से दुल्हार करना
अपने स्वरूप का उन्हीं से तदाकार करना
और धीमे-धीमे ईश्वरीय मिलन से स्वयं का उद्धार करना ।।
एकात्मता