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Facebook

सप्रेम स्वागत हमारे जीवन में फेसबुक भैय्या। 
किसी के तो आप माँ-बाप, कोई ढूंढे आप में सैंय्या।।
एक ही चेहरे को छोरे-छोरियां शेयर करते बार-बार। 
किसी-किसी के तो आप स्थायी बन गए घर-बार।।
आपकी कृपा से सबको मिल रहा रोजगार। 
शादी के बाद बच्चे का नाम क्या ?, देते समाचार।।
 
बात-बात पर तारीफें और अवसर पर बधाई। 
ऑनलाइन ही बँट रही खुशियों की मिठाई।।
 
कल कालू की काली शर्ट, आज फोटो फटे-हाल । 
दोनों ही सूरत में मिला कमेंट ‘कमाल’।। 
कमला की कल थी शादी, आज दिखा गोद में बच्चा। 
फेसबुक भैय्या बता दिया प्यार था कितना सच्चा।।
सुबह राम लाल ने अपनी फोटो शेयर कर लिखा था राम-राम। 
शाम को उसी फोटो पर लिखा आया हो गया राम-नाम।।
घर गली सड़क चौराहे उंगलियां होकर तुम पर सवार। 
ढूंढ रही भार्या (पत्नी) , खोज रही भरतार (पति)।। 
सुबह की शांति हो या ख़ामोशी हो रात की।
मानो कर दर्शन तुम्हारे, परिक्रमा कर रहे श्री नाथ की।।
यूजर खड़ा हो मंदिर में या बैठा हो कब्रिस्तान में। 
वास्तव में लेटा होता वह फेसबुक के गुलिस्तान में।।
फेसबुक तुम्हारा अहसान भला मानुष कैसे चुकाएंगे। 
मर गए जिस दिन तुम, लोग अपाहिज हो जायेंगे।।
जीवन में इतने गहरे उतर गए हो भैय्या फेसबुक। 
कि तुमसे ही मिलती ख़ुशी, तुमसे ही मिले दुःख।। 
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©vikasgarg