जहां शहरी चकाचौंध नहीं,
जहाँ खेतो मे ख़ुशहाली है,
गांव जहां हर दिन ऐसा लगता,
मानो शहरों की होली दीपवली है,
माना शहर-सी सुविधाओं की कमी है।
हर सुख-दुःख मे साथ होता है,
मानो कोई अपना ही दर्द होता है,
गांव जहां शहरी चकाचौंध नहीं,
पर हर जगह शांति की दिवारे होती हैं।
R. बिहारी
©ravicharan
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