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" गहन भाव "

भीतर से आवाज आती है
तो पहाड़ों की याद आती है
लगता है जैसे हवाएं उनका संदेश लेकर ,
हमारी सांसो में समाती है
पौधों की डालिया हमें अपनी और बुलाती है
आंखों में आकर वो रूबरू हो जाती है
चट्टानों की दृढ़ता हमें सहलाती हैं
भीतर में मजबूती का भाव जगाती है
पहाड़ों की ऊंचाइयां संसार की सुक्ष्मता दिखलाती है और सूरज की किरणे सार्थकता को चमकाती है
प्रकृति की सुंदरता हमें कितना कुछ सिखाती है
पर चकाचौंध की मिथ्यता हमें भटकाती है
प्रकृति हमसे हमारी मासूमियत चाहती है
और जीवन भर हमारा साथ निभाती है
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