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"घर"

मन के भीतर एक छोटा सा मकान बनाते हैं.....
द्रढ इरादो के पत्थर नीवं में सजाते हैं....
सरलता की मिट्टी सीमेंट में मिलाते हैं.....
परिश्रम की ईटो को लाइन में जमाते है.....
लग्न के मिश्रण से दीवार को समतल बनाते हैं....
नीवं के आगे मुस्कुराहट का दीप जलाते हैं....
दरवाजे का ख्याल मन से निकालते हैं क्योंकि सब का आसरा हो यही भीतर ख्वाब सजाते है......
नीवं से मकान की कल्पना में खो जाते हैं ,और भीतर ही चारपाई डालकर गहरी नींद में सो जाते है .....
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