कहने को तो हम घर की
परी है, फिर हमारी उड़ान
को क्यों रोक दिया जाता
है,
सपने दिखा कर दुनियाँ
के डर से एक हद में क्यों
बान्ध दिया जाता है,
चांद के जैसा बता कर
जमीन से नाता क्यों जोड़
दिया जाता है,
हर ब्रत - हर पूजा लड़कीयो
से ही कराया जाता है, पवित्र
मान कर अपवित्र क्यों
बता दिया जाता है,
कहने को तो हम घर की
परी है.. .
©banirai
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