V

गिद्ध

नोंच कर मांस, मेरा खुन पी रहे
गिद्धो की कैसी ये दावत है
चीख रहे चिल्ला रहे, खुन मेरा पीते-पीते
छोडना नही कुछ भी, मना करना इसकी तो आदत है
हम मर जाएंगे अगर रक्त ना पिया इसका
नस-नस में जो बहती, लगी उनको तो वो लत है
मेरे सारे संसाधनो पर कर कब्जा
सारी छीनी मेरी दौलत है
अगर करता अपने हक की बात
तो कहते, ये क्या गले पडी आफत है
पहचानते नही मुझको कभी
अब तो मानव होने पर ही धत्त है
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©vicky31