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गीता

ठान लिया था कि अब हम, और नहीं चलेंगे
पर गीता को हमने क्या पढ़ा, खुद से बग़ावत कर बैठे....
कभी नही रुकना है
सदैव कर्म करते रहना है
शुभ शर्मा
©shubh