छोड़ो हीन भावना मन की, अपने शस्त्रों को चमकाओ,
जातिभेद के रथी बदल कर , वर्ग रहित नव व्यूह रचाओ ,
मानवता के शत्रुओं को, तुमको सेवा पाठ पढ़ाना ,
बन जाऊँगा रथी तुम्हारा, विश्वोदय का रथ ले आना ,
विश्व विजय दिग्विजय करो तो , निजि स्वार्थ का कुम्भ फोड़ दो ।
गीता में अध्याय जोड़ दो ।।
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©vikasgarg
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