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ग़ज़ल

मिरी वफा ने मोहब्बत की जंग हारी है
अदा ने फिर से दगा़ से ही बाजी़ मारी है
बनाने लगता हूँ हर दम अनोखे मन्सूबे
तिरे हुसूल का ऐसा जुनून तारी है
तु लोट आए न आए ये तेरी मरज़ी है
तुझे निहारना आँखों की जिम्मैदारी है
हमारे प्यार में तो तुम ने जिन्दगी जी है
तुम्हारे प्यार में हम ने इसे गुजा़री है
सईद सागर
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