Y your_rohit en July 23, 2025 ग़म के मौसम में भी मुझे रोने नहीं देता, अँधेरे कितने भी हों, गुमशुदा होने नहीं… ग़म के मौसम में भी मुझे रोने नहीं देता, अँधेरे कितने भी हों, गुमशुदा होने नहीं देता। ऐसा नहीं है कि मुझे नींद नहीं आती, ये ज़िम्मेदारियों का शोर मुझे सोने नहीं देता। ©your_rohit