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ग़म सीने का ज़बां से कहा नहीं जाता , इस तरह भी अब और रहा नहीं जाता । छटपटाने…

ग़म सीने का ज़बां से कहा नहीं जाता , इस तरह भी अब और रहा नहीं जाता ।
छटपटाने के अलावा करें तो क्या करें , वो दर्द सह रहें हैं जो सहा नहीं जाता ।
©your_rohit