पहले दिन एक दूसरे से अनजान थे वो
15 दिन बाद एक दूसरे की जान थे वो।
हँसे भी थे, रोये भी थे
कुछ देर class में हम सोये भी थे।
15 दिनों ने सब कुछ सिखाया
एक बार तो बचपन से भी मिलवाया।
काश ये लम्हा यही थम जाता
GMCS एक घर बन जाता।
Tea break की फिर से अब याद आएगी
हंसते हंसते आंखे सबकी नम हो जाएंगी
अभी तो मजा आने लगा था
दिल मेरा भी उसे चाहने लगा था।
ना जाने अब कहा फिर मुलाकात होगी
देर सवेर अब कब बात होगी।
यह इस कारवे का अंत हैं
भीगी पलके और खामोश लब्ज है।
©bhaskararo
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