किसे बताए हालात राह-ए-रास्ता नहीं आते
बोलते तो हैं सभी कोई रहनुमा नहीं आते।
इन आंखों को ख्वाब देखे शायद महिने गुजर गए
निंद हर रोज आती है मगर शकुन ओ चैन नहीं आते।
खुशी की आंखों में आंसू की जगह रखना
बुरे जमाने कभी पुछकर नहीं आते।
मुझे सलिका है तहज़ीब ए गम समझने का
इसलिए रोने में आंसू नजर नहीं आते।
©anuragrahi
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