सोचा था कुछ लिखने को
लिखने बैठी लेकर कलम को
सुख गई स्याही हवा के आगोश में
कलम चलती रही स्याही सूखती रही
पंक्ति लिखती रही वहीं एक कतार से
नजर उठाया तो कतार चल रही थी
सीधी रेखा में वो चींटियों की कतार थी
बोझा उठाए मानो लंबे सफर में जाना हो
अग्रिम समय की चपेट से दूर कहीं
खुद को छिपाना चाहती थी
गति प्रारम्भ हुई पीछे कलम थी
गंतव्य दोनों का एक ही था।
©anusingh
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