गूगल जी का खेल देखिये।
अज्ञान हो गया फेल देखिये।।
अब हर कोई ज्ञानी है।
गूगल ज्ञान का दानी है।
छोटा हो गया मास्टरजी का माइंड।
बड़ी-बड़ी नॉलेज चुटकी में फाइंड।।
भर गयी दिमाग की झोली।
जैसे ही गूगल की किताब खोली।।
मिल गया एक विंडो में सब कुछ।
किसी ने पाया जॉब किसी ने दिल में कुछ – कुछ।।
घरवाली से लेकर उपलब्ध है नौकर।
ढूंढो बैठे-बैठे या बिस्तर पर सोकर।।
काव्या ने खरीदी किताब, कल्लू ने जूते।
किताब निकली फटी, जूते में नहीं थे फीते।।
गूगल पर प्यार आता बार – बार।
दिन भर में नैन-मटका कर लेते चार – बार।।
चले कंपनी की मीटिंग , या हो टीचर की टीचिंग।
उंगलियां कर रही होती गूगल पर सर्चिंग।।
सर्च होती रुमाल से लेकर धोती।
दादा – दादी से लेकर ढूंढ रही पोती।।
याद करने के लिए भी गूगल को करे याद।
जीवन की एक और जरूरत कर ली हमने ईजाद।।
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©vikasgarg
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