गुलशन के गुलों के संग भौंरे को साथ लिए जा
तन्हाई में वक्त गुजारने को मेरे गम को साथ लिए जा।
दिल चाहता है आशना हम मिजाज का हो
छोड़ दो जिस्म मेरे रूह को साथ लिए जा।
तेरे हाथों पर न चढ़ेगी किसी हिने का रंग
संवरने के लिए मेरे खुंन-ए-वफा को साथ लिए जा।
अब मुझे किसी भरोसे की जरूरत ही नहीं
अपनी इस इकरार-ए-मुहब्बत को साथ लिए जा।
रफ्ता-रफ्ता भुल जाउंगा मैं हर लम्हों को
दी हुई अपनी हर निसानी को साथ लिए जा।
अमानत-ए-प्यार तेरी छुपी है दिल-ए-अनुराग में
खुदा के वास्ते इस कहानी को साथ लिए जा।
©anuragrahi
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