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gumnaam

पाना चाहते थे बड़ी ही सिद्धत से जिन्हे, वो राह में
दुनिया की गुमनाम हो गए।
उन्हें पाने की चाहत में हम भी कहीं किस कदर
दुनिया मे बदनाम हो गए।
हम अपनों की भीड़ में कहीं अब अकेले नहीं
उनके ही बदौलत सरेआम हो गए।
कुछ गुस्ताखियां हमारी भी होंगी ।
वरना
कल तक उनके लिए एक अच्छी सुबह थे
आज ढलती हुई शाम हो गए।
©shivatomar