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गुमराह मुसाफरद

अरे जाग मुसाफर जाग जरा।
कर प्रस्थान लिया किस ओर।
दिशा ना देखी दशा ना देखी।
तु चल दिया सिर तोड़।
. . अरे जाग-----------------
गणना मे हम अरबों.देसी।
.पहरावा खाना पीना हुआ विदेशी।
तहज़ीब हमारी दब चुकी है।
ना जाने कहां किस गोर।
.... कर प्रस्थान-------------
कहने को कर ली तरक्की।
. भ्रष्टाचार भरा है बच्चा बच्ची।
इमान गुबार सा उड़ता जाए।
. ले चले.हवा जिस ओर।
कर प्रस्थान------------
©ramvir2760