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... गुमराह ज़माना

ऐ ज़माने!मै भी ज़माना!
मै गुज़रा!तु गुज़रता ज़माना!
आन पड़े जब,बुलवा लेना!
मै भी हाथ बटा दूँगा!
वस चला तो फिर से!
सवालाख से एक लड़वा दूँगा।
आन पड़े जब-------
मेरा सरनावा गर पूछे तु!
तो शरीके मे तुम्हारा भाई हूँ!
तज़ुर्बे मे भी गर पूछे तु!
डाक्ट्रेट की पतन्दर दाई हूँ!
हर नुसखा है पास मेरे!
मर्ज़ सब की हटवा दूँगा!
परिचय परदादा से करवा देना!
नादां बच्चों को समझा दूँगा!
आन पड़े जब---------
पैसे दे कर!ढूँडो!ख़ैर जिसमानी!
लोटे-तस्सबी-कासे!सब छुड़वा दूँगा!
पुड़ीया-कैप्सुल-टिकीया-सैर प्रभात सुहानी!
तसल्ली-बेकार दिलासे सब भुलवा दूँगा!
पैसे दे कर सैर सुबह करवाऊँगा!
मर्दों से हल्-रहट चलवा दूँगा!
पैसे दे कर ख़ैर सिहत दिलवाऊँगा!
नारी से चर्खी-चक्की-चाटी गुँजवा दूँगा!
आन पड़े जब---------
घर-घर मे तबेला एक बनवा दूँगा!
दो बैल यहां,लवेरा एक बँधवा दूँगा!
चिड़ीया चुँकी कि आलम ही जगवा दूँगा!
युँ धर्ती पे अनदेखी जन्नत ही बरता दूँगा!
आन पड़े जब-----------
नहीं मँजूर मुझे ये बैल तुम्हारा!
आहार प्रदूषण ही जो खाता है!
निसबत राहत की आफ़त फोक्ट मे!
प्रदूषण न-न जो ले आता है!
बैल खेतों व गाड़ी मे अपना जुतवाऊँगा!
आहार हरियाली-खुशहाली ही जो खाता है!
वैरी दसतूरी है जो इस प्रदूषण का!
फोक्ट मे भी सोना जो बरताता है!
माना!हर क्रिया मे ऊर्जा लगती है!
हर काम चले,जिसमानी अर्जित करवा दूँगा!
राहत मँत्व से ऊर्जा को बदला जाएगा!
वर्ना हड्ड-हरामी माथे पे लिखवा दूँगा।
आन पड़े जब--------------
सिहत दिलवा दूँगा!युँ रोज़गार दिलवा दूँगा!
बेरोज़गारी!बदकारी का तो तुख़म मिटवा दूँगा!
ऐसी की तैसी!पुड़ीया-कैप्सुल-टिकीया की!
सी-ऐम-सी,पी-जी-आई!फट्टे सब के चुकवा दूँगा।
आन पड़े जब-----------
युँ होगी फिर दुनिया की तामीर नई!
जन-जन को तदबीर यही समझा दूँगा!
उथल-पुथल फिर यदि कोई आई तो!
फिर से चक्कबँदी या बन्दोबस्त करवा दूँगा।
आन पड़े जब---------
©ramvir