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गुमशुदा

हम तो अभी तक यह भी नहीं जान पाये कि हमें डर किस बात का है,
तुम हमें प्यार नहीं करोगे इस बात से या मैं तुमसे प्यार करना कभी बन्द नहीं करूँगी इस बात से।
कुछ ज़्यादा ही ज़ुल्म कर दिये मैंने अपने दिल पर उसके लिए,
मैंने उसे हमेशा उस ही के हवाले किया जिसे उसकी क़दर ना थी।
वो कहते हैं की हमें फिक्र नहीं तो,
अब तो हम दोनो ने छोड़ दि है फिक्र करनी,
मैंने अपनी और उसने मेरी।
कितने आसान हो गये थे रास्ते तुम्हारे साथ के साथ,
कुछ देर और चल लिया होता, क्यों यूँ अंजान बन गये?
अजीब ही रंग मैं गुज़र रही है अब मेरी ये ज़िन्दगी,
दिलों पर तो राज कर लिया मगर मोहोब्बत को तारस गये।
एक दिन मैंने सोच शायद खो दिया है मैंने अपना दिल,
शायद कर दिया है किसी के हवाले,
फिर देखा वो तो रो रहा था एक कोने में बैठा।
©ritti