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गुनाह

गुनाहा किसका था, सजा किसे मिल रही है,
ये हँसी तो बस दो पल की यारों,मौत तो पल पल मिल रही है।
जो कद्र तक नही कर सकते किसी की चाहत की,
जरा देखो उन्हें आज वफ़ा भरे बाजार मिल रही है।
हमने भी कोशिश की थी, उस बाजार से थोड़ी वफ़ा खरीदने की,
पर हमें तो उस बाजार की हर दुकान ही खाली मिल रही है।
©roshan10