गुरु
गुरु वह शक्ति हैं, जो गिरते हुए को थाम लेते हैं,
गुरु वह साहस हैं, जो अंधकार में भी राह बना देते हैं।
अगर जीवन युद्ध है तो गुरु ही अर्जुन का गांडीव हैं,
और अगर राह कठिन है तो गुरु ही ध्रुवतारा बन खड़े हैं।
गुरु कहते हैं —
“मत डरो ठोकरों से, यही ठोकर तुम्हें मज़बूत बनाएगी,
मत झुको विपरीत हवाओं से, यही हवा तुम्हें ऊँचाइयों तक ले जाएगी।”
गुरु ही वह शिल्पकार हैं, जो पत्थर को मूरत बना देते हैं,
गुरु ही वह संगीत हैं, जो खामोशी को भी स्वर दे जाते हैं।
यदि दीपक की परिभाषा चाहिए तो गुरु स्वयं जलकर रोशनी बाँटते हैं,
यदि सागर का उदाहरण चाहिए तो गुरु गहराई में भी मोती खोज लाते हैं।
उनकी डाँट भी आशीष होती है,
उनका मौन भी उपदेश होता है।
यूं कहूं तो,
उनके बिना विद्यार्थी अपूर्ण है।
आज इस दिन हम प्रणाम करते हैं,
उन गुरुओं को, जो केवल अध्यापक नहीं,
बल्कि हमारे स्वप्नों के सेनापति हैं —
जो हमें लड़ना सिखाते हैं,
जो हमें जीतना सिखाते हैं।
- जाह्नवी
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