गवना करा के सैंया ले जा तू हमरा
रात काटत बानी कैसहू अब हम नैहरा
रात काटत बानी कैसहू अब हम नैहरा
गवना करा के सैंया ले जा तू हमरा
रात काटत बानी कैसहू अब हम नैहरा
रात काटत बानी......................
जब से बनवलऽ सैंया हमके तू अपन
पनीयो न निक लागे न भोग छप्पन
खिड़िकिया से देखत बानी छने छने बहरा
गवना करा के सैंया ले जा तू हमरा
रात काटत बानी कैसहू अब हम नैहरा ।
मन में खुमार आवे जोबना उभार लावे
सैंया मोर सपनवा में सोलहऽ श्रृंगार लावे
बांध के तू आ जा ज़ल्दी माथावां में सेहरा
गवना करा के सैंया ले जा तू हमरा
रात काटत बानी कैसहू अब हम नैहरा ।
न अइबऽ बालम त इ कली सुख जाई
प्रेम के धारवा के मन में पानी के पटाई
बची न हमार देहिया त काहे खातिर लैबऽ गजरा
गवना करा के सैंया ले जा तू हमरा
रात काटत बानी कैसहू अब हम नैहरा
रात काटत बानी कैसहू अब हम नैहरा
गवना करा के सैंया ले जा तू हमरा ।
©anuragrahi
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