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हालात

हालात इतने अलग हो गए
हकीकत हलक से उतरती नहीं
समंदर भी अब प्यासा हो गया
नदिया सीधी बहती नहीं
धुंध में नज़ारा धुंधला इतना
सूरज भी पूरा दिखता नहीं
मैं आग में इतना जल चुकी हूं
अब पानी से भी बुझती नहीं
©namrata05