हालात संभलते संभलते जामाना लगता है
ये किस्सा कहीं सुना सुनाया लगता है।
आग का क्या है पल दो पल में लगती है
बुझते बुझते उसे एक जमाना लगता।
आपकी सुरत चांद से खुबसूरत लगती है
जिने के लिए इक उम्मीद इक बहाना लगता है
तेरे तिरछे तिरछे तिर नज़र के लगते है
सिधा सिधा मेरे दिल पे निशाना लगता है
महफूज़ नहीं रख पाएंगे हम ख्वाब-ओ-ख्याल
हर गली का बच्चा बच्चा सयाना लगता है।
सच है अनुराग का दिल आज छलनी है
मगर मुझको हर चेहरा फसाना लगता है।
©anuragrahi
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