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हां सीखा है मैंने

खाना सीखा है कुछ तो बासी नमक रोटी जो
कुछ लोगों को नसीब नहीं।
गाना सीखा है कुछ तो कान्हा के भक्ति राग को ।
मुस्कुराना सीखा है देखकर
फूलों की मोहक मासूमियत को।
जीना सीखा है गर तो औरों के लिए।
©anusingh