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हार जाने दो

इस दर्द को नफरत में बदलने दो
हर बाज़ी को हार जाने दो
जमाने को सब कह भी लेने दो
तारीफ़ में हमारी कुछ गलत कहने दो
वक्त पलटेगा हम शुरू फिर से होंगे
हमारी नई जीत को जश्न मनाने दो
कल यही हमारी खिदमत में होंगे
आज अपनी इन्हे कर लेने भी दो
डर होगा तब आज के किए का
अफसोस की वो वजह बना लेने दो
आज जो बेज़्जती करते है हमारी
उन्हें कल बेज़्जत हो जाने दो
हार से इस जीत की उड़ान तय होगी
आज कुछ ज्यादा हार जाने दो।
©namrata05