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है जिद हमारी लेकिन

है जिद हमारी लेकिन
तुम अपने जिद पर मत रहना
हों गर कोई शिकवा मुझसे तो
हर बात बेख़ौफ़ तू कहना।
ये मेरी जिंदादिली को कोई
पहचान न सका इस दुनिया में
मुद्तों से रही हो साथ मेरे
भुलने की इबादत मत करना।
है जिद हमारी लेकिन
तुम अपने जिद पर मत रहना।
दुनिया को तसव्वुर आएगा जब
बच जाएंगी फकत यहां ख़ाक मेरी
मक़तल पर अरमानों को चढ़ाएं है
तु मेरे जज़्बातों का क़त्ल मत करना।
है जिद हमारी लेकिन
तुम अपने जिद पर मत रहना।
ये कैसा सफ़र है जो दश्त-ए-गम के तरफ़
मुसलसल ले जा रही है मुझे
ख़ुश रहो और हमसे बात करों
कभी इस ग़म के चक्कर में मत पड़ना
है जिद हमारी लेकिन
तुम अपने जिद पर मत रहना
हों गर कोई शिकवा मुझसे तो
हर बात बेख़ौफ़ तू कहना।
©anuragrahi