अंदर से टूटी हुई हू,
मुझे जोड़ पाओगे क्या??,
मोहब्बत करना चाहती हूं,
निभा पाओगे क्या??,
लाखों बार तोड़ा है उसने,जुड़ना मुश्किल है,
फिर भी कोशिश करोगे क्या??,
आंसू आ जाते हैं हर वक्त आंखों में,
उन्हें रोककर, मुस्कुराना सिखाओगे क्या??,
पागलपंती बहुत करती हूं मैं,
मुझे समझदार बनाओगे क्या??,
बहुत बात करनी है तुमसे,
थोड़ा सा रुक कर, मुझे सुनोगे क्या??,
अब विश्वास नहीं करती हूं किसी पर,
पर मेरी दोस्ती का आखरी चिराग बनोगे क्या??,
बहुत सारी उम्मीदें हैं तुमसे,
उन सभी पर खरे उतर पाओगे क्या??.,
मोहब्बत करना चाहती हूं तुमसे,
निभा पाओगे क्या??
©starpoet
S