V

हिंदी

चेतना के बंद पट खोलती है हिंदी, 
और भारतीय होने का प्रमाण बन जाती है। 
घनानंद, केशव के कुंज में विहारती तो, 
भूषण की युद्ध में कृपाण बन जाती है। 
भारत स्वतंत्रता का पांचजन्य फूंकने को, 
विकास के महाप्राण बन जाती है। 
देश स्वाभिमान हेतु शत्रु को संहारती तो, 
पृथ्वी का शब्दभेदी बाण बन जाती है। 
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©vikasgarg