वर्णों के मेल में जीवन का खेल वर्णित है
भावो की डोर से हर कोई बंधित है
परिस्थितियों की उथल-पुथल में मन उनका चिंतित है कर्मों की निष्क्रियता से हृदय उनका पीड़ित है
सार्थकता का भाव भीतर उनके इंगित है
पर उसे खोजते उनके प्रयास सीमित है
खाली पन्नों की पुकार से ,
उनके भाव उन पन्नों में अंकित है
बजते जब उनके शब्दों के संगीत है
तब सुनते हैं लोग उनके भाव के गीत है
समझने की प्रक्रिया का कैसा ये अतीत है
शब्दों की वर्णमाला भाषा में रचित है
लिखता इनको हमारा ह्रदय ,
तन्मयता में पुलकित है
इस भाषा में हमारी भावनाएं जीवित है
जो कहीं लिखित है ,
किसी के सामने प्रकटित है ,
या मन के दरवाजों में सज्जित है.....
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