हृदय से निकलकर,
हृदय को सहलाती
और हृदय की पंक्तियों में ही दाखिल हो जाती
एक को निष्शेष कर ,
दूसरे में प्रवेश हो जाती
हृदय को छु कर, जो भाव को दर्शाती
आंखों से छलके शब्दों को , उच्चारण में लाती
कानों को मधुरता से जो, पोषित कर जाती
शब्दों की कसौटियो में ,मुस्कुराहट जो लाती
मधुरता में लिपटी ऐसी भाषा है वो
जो वाणी की तरंगों से भीतर की लहरों को चलाती।।
©myemotions
M