हिंदी ही मेरी ज्ञान चेतना,
चाहत यादें सपने मेरे सब हिंदी से हैं।
हिंदी ही मेरी परिकल्पना,
हर रस, भाव, सृजन जीवन का आधार है हिंदी।
स्वीकार कोई अवमानना हिंदी है,
मेरे भारत की बिंदी और विरासत,
हिंदी से हिंदू और हिंदुस्तान है,
हिंदी से है हर संभावना।
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©vikasgarg
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