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हिंदी महाराजा

ईरानी प्राचीन भाषा अवस्ता,
'स' का 'ह्' सा बोला जाना
सिंधू से हिंदू का बनना,
और लैटिन से 'इंदिया' का आना।
देवनागरी लिपि से युक्त,
'ज़बान-ए-हिंदी' का पद पाना
हिंदवी, दक्खिनि, आर्यभाषा, भाख़ा,
आदि सब नामों से जाता है इसे जाना।
अवधी, बुंदेली, हरियाणवी, ब्रज
और अनेकानेक हैं इसकी बोलियां,
तत्सम-तत्भव, देश-विदेशी,
आदि में है इसे विभाजित किया।
शुभ नाम इसका मैं क्या बोलूं!
महात्मा गांधी ने जिसे राष्ट्रभाषा माना,
"स्वराज का प्रश्न" के समान जिसे जाना
हिन्दुस्तान की जो आज है राजभाषा,
उसी का नाम है ""हिन्दी महाराजा"""।
ना मान-सम्मान, धन-दौलत यां इज़्ज़त
कुछ नहीं चाहती है यह पाना,
ना कोई सप्ताह, ना ही महीना और ना ही पखवाड़ा
बस चाहिए इसे उम्र भर स्वीकारा एवं बोला जाना।
द्वारा - किरन शर्मा
( एक सशक्त नागरिक)
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