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हिसाब वहशत-ए-इश्क का भी रखा जाए।

हिसाब वहशत-ए-इश्क का भी रखा जाए
एकतरफा प्यार में यूं न अब कभी बहा जाए।
लगा कर रास्ते में मेरे ज़श्न-ए-मंजिल
इस क़दर रास्ता न हमारा रोका जाए।
हटा लो सामने से मय-ए-हुस्न की बोतल
ये तौबा कहीं मुझ से टकरा न जाए।
या-रब मुहब्बत गर नजरों में तेरी जुर्म है तो
मैं भी तेरा मुजरिम हूं मुझे न बख्शा जाए।
बहुत अच्छी होती है सेहत के लिए सुबह की हवा
वो हवा ही क्या जिससे कोई कली मुरझा जाए।
जलन कुछ कम हो जाएगी दिल-ए-अनुराग की
फकत उनके लबों पर गर मेरा नाम आ जाए।
©anuragrahi