हम आए न आए याद मगर मुझको तुम आओ
सोंचुं मैं तुझे दिन-रात ख्यालों में तुम आओ।
बेइंतिहा है मुझे प्यार और मिलने को दिल बेकरार
रातों के निंद में ही सही ख्वाबों में तुम आओ।
जख्म ये नासूर बन गया है मेरे मासूम दिल में
बन के हर जख्मों का इलाज तुम आओ।
मैं तन्हा हूं तेरे शहर में यहां किसी का आशना नहीं
इक दोस्त की तरह देने मेरा साथ तुम आओ।
जानता हूं दरम्यां तेरे मेरे कोई रिश्ता मुमकिन ही नहीं
जोखिम उठा लो एक बार करके मुमकिन तुम आओ।
हसरत भरी निगाहें तेरे लिए फैली हुई ये बांहें
तहे-दिल से अनुराग पुकारें बार बार तुम आओ।
©anuragrahi
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