P

हम काफी है...

हमें सम्भलने के लिए किसी हाथ की जरूरत नहीं है,
मैं तन्हा ही काफी हुँ, अपने हर सफ़र के लिए,
अब डर नहीं लगता है मुझे सुनसान वीरान रास्तों से,
मैंने अंधेरों से ईट मांग ली है, अपने नए घर के लिए,
दरिया था एक मेरा भी, जिसमें सपनें थे मेरे-उनके,
अब सपनें भी सो गए है, एक नए सहर के लिए,
अब ज़िंदगी तो है मगर उसमें ज़िंदगी नहीं है,
अब जी रहे है ज़िंदगी, बस एक बसर के लिए..!!
©priya_vish