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हमारे भारत जैसा कोई नहीं

हमारा नभ-चुंबी हिमराज, विश्व में इतना ऊँचा कौन?
हमारी ही भागीरथी पवित्र नदी इतनी गौरवमय कौन?
हमारे ही उपनिषद्‌ महान, श्रेष्ठतम कहे विश्व हो मौन।
जहाँ की धरती ही दिन-रात स्वर्णकिरणों की चमक रही।
चलो गाएँ हम 'भारत की समता में कोई देश नहीं',
देश जो ऋषियों की तपभूमि, जहाँ पर उपजे वीर महान,
जहाँ गूँजे नारद के गीत, जहाँ सद्विषयों का सम्मान,
जहाँ पर अतुल ज्ञान है भरा,दिए उपदेश बुद्ध भगवान,
हिंद से अधिक, विश्व में कोई देश कहीं प्राचीन नहीं,
चलो गाएँ हम 'भारत की समता में कोई देश नहीं,
विघ्न-बाधाओं से क्यों डरें? दीन बन कष्ट न भोगें कभी,
स्वार्थ में नीच कर्म क्यों करें?निराश न हों इस भू पर कभी,
मूल, फल, कदली, पय, मधु, धान, भरे-पूरे भारत में सभी,
आर्यजन की इस धरा समान, समुन्तत धरा न दूजी कहीं,
चलो गाएँ हम 'भारत की समता में कोई देश नहीं'
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©vicky